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December 4, 2018
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उच्चतम न्यायालय के आदेश के द्वारा बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी दरों सुनिश्चित करने के लिए श्रम विभाग दिनांक 10 दिसंबर, से 10 दिन का एक विशेष अभियान चला रहा है




नई दिल्ली : 04/12/2018| दिल्ली सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री गोपाल राय ने बताया कि सभी श्रमिकों को बढ़ी हुई मजदूरी दरों से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए श्रम विभाग दिनांक 10 दिसंबर, 2018 से 10 दिन का एक विशेष अभियान चला रहा है। इसके अंतर्गत श्रम विभाग के सभी जिलों में प्रर्वतन टीम बनाई जाएगी जिसमें सहायक श्रमायुक्त, श्रम अधिकारी, निरीक्षण अधिकारी, कंपनी निरीक्षक और श्रम निरीक्षक की अगुवाई में विभिन्न कारखानों/कंपनियों का निरीक्षण किया जाएगा।

1 नवंबर, 2018 से लागू न्यूनतम दरें –
अकुशल श्रमिक रु 14000/- प्रतिमाह, रु प्रतिदिन – 538/-
अर्द्धकुशल श्रमिक रु 15400/- प्रतिमाह, रु प्रतिदिन – 592/-
कुशल श्रमिक रु 16962/- प्रतिमाह, रु प्रतिदिन – 692/-

इस विशेष अभियान के अंतर्गत सभी जिला संयुक्त आयुक्तों/उपायुक्तों को यह आदेश दिया गया कि वे अपने जिले के नियोक्ताओं/नियोक्ता संगठनों के साथ बैठकें कर उनसे न्यूनतम मजदूरी की बढ़ी हुई दरों को लागू कराए साथ ही उन्हें न्यूनतम मजदूरी के उल्लघंन पर, दिल्ली सरकार द्वारा, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 2017 में किए गए कड़े प्रावधानों से अवगत करवाएं।

जिन श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है, वे श्रमिक हैल्प लाईन 155214 पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं जिन पर श्रम विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

न्यूनतम मजदूरी न देने वाले नियोक्ताओं के विरूद्ध संबंधित जिला श्रम कार्यालय में दर्ज कराई जा सकती है। श्रम निरीक्षकों द्वारा शिकायतों के आधार पर नियोक्ताओं के रिकार्ड की जांच उनकी फैक्ट्री या कार्यालय में की जाती है। इस जांच के आधार पर श्रमिकों को संबंधित संयुक्त/उप श्रमायुक्त के समक्ष अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत दावा करने की सलाह दी जाती है। यदि नियोक्ता कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो मेटाªेपालिटन मजिस्ट्रेट के न्यायालय में उनका चलान लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा प्रस्तुत रिकार्ड के आधार पर न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए चालान/अभियोजना, मेट्रोपालिअन मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दर्ज करवाई जाती है।

दिल्ली सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी संशोधन अधिनियम 2017लागू किया गया है। अब न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करने वाले नियोजकों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना या तीन वर्ष की जेल या दोनों का दंड एक साथ लगाया जा सकता है।

सभी नियोजनको को यह आदेश दिया गया है कि मजदूरी/वेतन का भुगतान चेक द्वारा या सीर्ध बैंक ट्रांसफर द्वारा श्रमिको के खाते में किया जाए।
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